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रिपोर्ट रोशन सोनी
सूरजपुर से एक दर्दनाक सच्चाई
सूरजपुर जिले में एक बार फिर महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। बाल संरक्षण के नाम पर की गई कार्रवाई ने कई गरीब परिवारों की ज़िंदगी में डर, दर्द और बेबसी भर दी है।
कुदरगढ़ धाम से जुड़े ग्रामीणों का आरोप है कि उनके छोटे-छोटे बच्चों को बिना ठोस जांच के जबरन उठा लिया गया। इस घटना के बाद पूरे इलाके में भय और आक्रोश का माहौल है।
पीड़ित परिवारों का कहना है कि 8 अप्रैल 2026 को चाइल्ड लाइन और बाल संरक्षण इकाई की टीम ने कार्रवाई करते हुए कई बच्चों को अपने साथ ले लिया। इनमें 6 साल, 7 साल, 9 साल और 11 साल तक के मासूम बच्चे शामिल हैं।
परिजनों का आरोप है कि बच्चों पर भीख मंगवाने का झूठा आरोप लगाकर उन्हें उनसे अलग किया गया।
बिलखते हुए एक पिता की आवाज़—
“साहब, हम भीख नहीं मांगते… मेहनत करके अपने बच्चों का पेट पालते हैं।”
बताया जाता है कि वह रोज़ मेहनत-मजदूरी करके महज़ 200–300 रुपये कमाता है और उसी से अपने परिवार का गुज़ारा करता है। ऐसे में बच्चों पर भीख मंगवाने का आरोप उनके लिए किसी गहरे घाव जैसा है।
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने मजदूरों से जबरन दस्तावेजों पर अंगूठा लगवा लिया, बिना यह बताए कि वे किस बात पर सहमति दे रहे हैं।
10 अप्रैल को जब परिजन कलेक्टर कार्यालय पहुंचे, तो उन्हें बताया गया कि बच्चों को 8 दिन बाद वापस सौंपा जाएगा।
इस बीच घरों में माताओं का रो-रोकर बुरा हाल है, और पूरा परिवार गहरे मानसिक आघात से गुजर रहा है।
बड़ा सवाल
क्या बाल संरक्षण अब सिर्फ आंकड़ों का खेल बनकर रह गया है?
क्या बिना सही जांच के बच्चों को परिवार से अलग करना न्यायसंगत है?
क्यों हर बार गरीब और ग्रामीण परिवार ही निशाने पर आते हैं?
क्या यही है “बाल संरक्षण” का असली चेहरा?
यह मामला अब केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि गरीब परिवारों के सम्मान, संवेदनशीलता और न्याय की लड़ाई बनता जा रहा है।

रोशन कुमार सोनी SurajpurNews24x7 के मुख्य संपादक हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 3 वर्षों का मैदानी समाचार कवरेज अनुभव है। उन्होंने विभिन्न पत्रकारों के साथ मिलकर स्थानीय और सामाजिक मुद्दों पर कार्य किया है। निष्पक्ष, सटीक और जिम्मेदार पत्रकारिता उनकी पहचान है।

