नकटी गांव में बुलडोजर कार्रवाई के बाद उभरा जनआक्रोश: सामाजिक कार्यकर्ता मनीष टोडर का अनिश्चितकालीन अनशन जारी, ग्रामीणों ने उठाए पुनर्वास, संवैधानिक अधिकार और प्रशासनिक जवाबदेही के सवाल

रायपुर/नकटी | सूरजपुर न्यूज़ 24×7 | विशेष संवाददाता

रायपुर जिले के ग्राम नकटी में हाल ही में हुई बुलडोजर कार्रवाई को लेकर ग्रामीणों में असंतोष और चिंता का माहौल बना हुआ है। कार्रवाई से प्रभावित होने का दावा करने वाले परिवारों के समर्थन में सामाजिक कार्यकर्ता मनीष टोडर पिछले कई दिनों से अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे हुए हैं। आंदोलन लगातार व्यापक होता जा रहा है और ग्रामीण प्रशासन से निष्पक्ष जांच, पुनर्वास तथा जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।

अनशन स्थल पर बड़ी संख्या में ग्रामीण, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक पहुंचकर अपना समर्थन जता रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बुलडोजर कार्रवाई के दौरान कई परिवारों के मकान और आशियाने प्रभावित हुए, जिससे अनेक लोग बेघर होने की स्थिति में पहुंच गए। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी शेष है और प्रशासन का विस्तृत पक्ष सार्वजनिक रूप से सामने आना बाकी है।

प्रधानमंत्री आवास योजना के मकानों पर कार्रवाई का भी आरोप

आंदोलनकारियों का आरोप है कि बुलडोजर कार्रवाई के दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत निर्मित कुछ मकानों को भी नुकसान पहुंचा। उनका कहना है कि यदि सरकारी योजना के तहत स्वीकृत आवासों पर कार्रवाई हुई है, तो यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि उन मकानों की कानूनी स्थिति क्या थी और किन आधारों पर उन्हें हटाया गया।

फिलहाल प्रशासन की ओर से इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगें

अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता मनीष टोडर और ग्रामीणों ने प्रशासन के समक्ष कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं—

  • बुलडोजर कार्रवाई की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच।
  • प्रभावित परिवारों का सर्वे कर पुनर्वास और उचित मुआवजा।
  • पूरी कार्रवाई के दौरान अपनाई गई कानूनी प्रक्रिया की जांच।
  • यदि किसी अधिकारी की लापरवाही या नियमों का उल्लंघन पाया जाए तो उसके विरुद्ध कार्रवाई।
  • संविधान के अनुच्छेद 300A के अनुरूप संपत्ति संबंधी अधिकारों का संरक्षण सुनिश्चित किया जाए।

अनुच्छेद 300A को लेकर उठे सवाल

आंदोलनकारियों का कहना है कि भारत के संविधान का अनुच्छेद 300A स्पष्ट करता है कि किसी भी व्यक्ति को उसकी संपत्ति से केवल विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार ही वंचित किया जा सकता है। उनका आरोप है कि यदि पर्याप्त नोटिस, सुनवाई का अवसर और अन्य वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन किए बिना कार्रवाई की गई है, तो इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

हालांकि किसी भी मामले में यह निर्धारित करना कि कानूनी प्रक्रिया का पालन हुआ या नहीं, संबंधित दस्तावेजों, प्रशासनिक रिकॉर्ड, न्यायालय के आदेशों तथा सक्षम प्राधिकारी की जांच पर निर्भर करता है।

ग्रामीणों की पीड़ा

प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी भूमि को लेकर विवाद था, तब भी प्रशासन को पहले पर्याप्त नोटिस देना चाहिए था, लोगों को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए था तथा आवश्यक होने पर वैकल्पिक पुनर्वास की व्यवस्था की जानी चाहिए थी।

ग्रामीणों का कहना है कि गरीब परिवारों के लिए उनका घर केवल एक मकान नहीं बल्कि जीवनभर की कमाई और सुरक्षा का आधार होता है।

प्रशासन से जवाबदेही की मांग

आंदोलनकारियों ने प्रशासन के समक्ष कई महत्वपूर्ण प्रश्न भी उठाए हैं—

  • बुलडोजर कार्रवाई का आदेश किस अधिकारी ने जारी किया?
  • कार्रवाई किस कानून और किस आदेश के तहत की गई?
  • प्रभावित परिवारों को कितने दिन पहले नोटिस जारी किया गया?
  • क्या प्रभावित लोगों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया?
  • क्या पुनर्वास अथवा वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की गई?

ग्रामीणों का कहना है कि इन सभी प्रश्नों के स्पष्ट और सार्वजनिक उत्तर मिलने चाहिए ताकि पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

राजनीतिक आरोप भी लगे

आंदोलन के दौरान कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई राजनीतिक कारणों से प्रेरित हो सकती है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित राजनीतिक दलों तथा प्रशासन का पक्ष सामने आना अभी शेष है।

मवेशियों को नुकसान पहुंचने के आरोप

कुछ प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि बुलडोजर कार्रवाई के दौरान मवेशियों को भी नुकसान पहुंचा। यदि ऐसे आरोप सही पाए जाते हैं, तो उनकी भी निष्पक्ष जांच कर दोष तय किए जाने की मांग की जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का भी हवाला

आंदोलनकारी सर्वोच्च न्यायालय द्वारा समय-समय पर दिए गए उन निर्देशों का भी उल्लेख कर रहे हैं, जिनमें प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान कानूनसम्मत प्रक्रिया, पारदर्शिता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करने पर बल दिया गया है। किसी भी मामले में प्रक्रिया का उल्लंघन हुआ या नहीं, इसका अंतिम निर्णय संबंधित न्यायालय अथवा सक्षम प्राधिकारी द्वारा उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर किया जाता है।

मनीष टोडर का बयान

अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता मनीष टोडर ने कहा कि उनका आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं बल्कि प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने के उद्देश्य से किया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, यदि किसी अधिकारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाए तथा प्रभावित परिवारों को शीघ्र राहत और पुनर्वास उपलब्ध कराया जाए।

प्रशासन के पक्ष का इंतजार

समाचार लिखे जाने तक प्रशासन की ओर से सभी आरोपों पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं हुई थी। प्रशासन का पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा ताकि पाठकों के सामने मामले का संतुलित और तथ्यात्मक चित्र प्रस्तुत किया जा सके।

निष्कर्ष

नकटी गांव का यह मामला केवल बुलडोजर कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक प्रक्रिया, नागरिक अधिकारों, पुनर्वास, पारदर्शिता और जवाबदेही जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को भी सामने लाता है। यदि ग्रामीणों के आरोप सही पाए जाते हैं तो निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई आवश्यक होगी। वहीं यदि प्रशासन ने सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया है, तो उसका विस्तृत विवरण सार्वजनिक किया जाना भी उतना ही जरूरी है।

फिलहाल सामाजिक कार्यकर्ता मनीष टोडर का अनिश्चितकालीन अनशन जारी है और प्रभावित ग्रामीण निष्पक्ष जांच, पारदर्शी कार्रवाई तथा न्यायपूर्ण समाधान की मांग पर अडिग हैं।

By Roshan Kumar Soni

रोशन कुमार सोनी SurajpurNews24x7 के मुख्य संपादक हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 3 वर्षों का मैदानी समाचार कवरेज अनुभव है। उन्होंने विभिन्न पत्रकारों के साथ मिलकर स्थानीय और सामाजिक मुद्दों पर कार्य किया है। निष्पक्ष, सटीक और जिम्मेदार पत्रकारिता उनकी पहचान है।

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